…जब ट्रेन को कहना पड़ा अलविदा

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चेन किसने खींची, चेन किसने खींची…? (दो आरपीएफ के जवान ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते हुए आ रहे थे)
उन्हें देख कर चंचल ने बिना डरे कहा- मैनें खींची थी, और फिर एक ही सांस में थर्ड ऐसी कम्पार्टमेंट की चेन खींचने की वजह बताते हुए उसने अपनी सफाई पेश कर दी। इस बीच एक जवान चंचल के बताए कारणों को अपने कैमरे में सबूत के तौर पर कैद किए जा रहा था, चेन पुल करना कानूनी अपराध है अगर वो बिना कारण की पुल की गई हो तो।

जितनी जल्दी ट्रेन को प्लेट फार्म छोड़ने की थी उससे ज्यादा जल्दी में चंचल ने अपनी बात आरपीएफ के जवान के सामने रख दी…उसकी आवाज इस बात की गवाह थी कोई जरूरी वजह रही होगी जिसके कारण चंचल ने ट्रेन को रोकने के लिए चेन खींचने की ज़हमत उठाई थी….

ऑफिस में बैठे-बैठे चंचल और रोहन काम के बोझ से सूकून की तलाश में भोपाल (जो मध्यप्रदेश की राजधानी है) से कहीं बाहर जाने का प्लान कर रहे थे…उनके साथ चंचल के राखी भाई (जिसे चंचल ने मसूरी से देहरादून आते समय भाईजी नाम दिया था) जमाने भर की खोज बीन करने के बाद दोनों फैमिली का उत्तराखण्ड जाने का प्रोग्राम बना और सुविधा देखते हुए थर्ड ऐसी में आने जाने का रिजर्वेशन करवाया।

इस बीच सबने ठंडे प्रदेश के मौसम के हिसाब से सारी जरूरी खरीददारी कर ली थी…वो दिन भी जल्दी आ गया जब सबको भोपाल मैन स्टेशन पर साढ़े नौ बजे पहुंचना था…चूकी रोहन और चंचल का घर स्टेशन से महज 7 किलो मीटर दूर था तो दोनों समय पर स्टेशन पहुंच गए और आपने भैया भाभी और उनके बेटे का स्टेशन पर आने का इंतेजार करने लगे…चंचल जो बहुत जल्दी घबरा जाती है ट्रेन को सामने और भाई जी की प्लेटफार्म पर अनुपस्थिति देखते हुए चंचल के हाथ अपने आप ठंडे होने लगे, शायद ये डर था एक बहतरीन सफर पर जाने से पहले ट्रेन छूटने का…अब रोहन और चंचल दोनों ने बारी बारी से भाई जी को फोन करना शुरू किया और भाई जी भी रास्ते में थे लेकिन उनके और स्टेशन के फासले ने घबराहट को और बढ़ा दिया था…खेर ट्रेन को स्टेशन पर 10 मिनट रुकना था…लेकिन अब जब ट्रेन ने चनले के लिए हॉर्न दिया तो पूरी तरह से अंदेशा हो चुका था कि ट्रेन छूट जाएगी..

चंचल ने रोहन से कहा
चंचल- तुम दूर रहना मैं ट्रेन की चेन खींचुंगी, क्योंकि मैं लड़की हूं तो मुझे कानूनी कार्रवाई में कुछ रियायत मिल जाएगी।
रोहन ने भी इसके लिए हामी भर दी, अब चंचल ने ट्रेन में चढ कर चेन पुल कर दी तभी दो आरपीएफ के जवान ज़ोर ज़ोर से चिल्लाते हुए आ रहे थे चेन किसने खींची चेन किसने खींची…
दोनों को ट्रेन से उतारते हुए आरपीएफ के जवान ने टिकट की मांग करते हुए कहा-
जवान- अगर तुम दोनों को जाना है तो जाओं नहीं तो ट्रेन से उतरो
चंचल बार-बार रिक्वेस्ट कर रही थी
चंचल- वो लोग आते ही होंगे प्लीज़ दो मिनट के लिए रोक दो, वो जिद्द एक दम उस छोटे बच्चे की जिद्द की तरह थी जो अपनी पसंद के खिलौने की चाहत के आगे कुछ भी समझना नहीं चाहता है
लेकिन ऐसा कहा संभव था कि एक साधारण यात्री के कहने पर समय पर चलने वाली ट्रेन रुक जाए…चंचल और रोहन दोनों ने फैसला लिया कि भाई जी के साथ में ही जाएंगे नहीं तो उतर जाते हैं
और फिर क्या था दोनों के सामने से ट्रेन ने निकलने के लिए एक दम से स्पीड नहीं पकड़ी थी मानों ट्रेन कहना चाहती हो कि क्यूं सोच रहे हो इतना बैठ जाओ और अपनी इस जर्नी को हैप्पी जर्नी में बदल दो…लेकिन दोनों अपने फैसले पर बने रहे और ट्रेन तुम्हारी जैसी मर्जी बोल कर निकल गई…

अब जैसे ही दोनों ने बे मन से ट्रेन को अलविदा कहा रोहन का फोन बजा…सही सोचा आपने वो फोन भाई जी का ही था और भाई जी के शब्द थे हम ट्रेन में चढ़ गए हैं लेकिन चलती ट्रेन में विकलांग कोच में चढ़ पाए….और रोहन का जवाब था हम प्लेटफॉर्म पर आपका वेट करने के लिए उतर गए….

जाना तो था किस्मत से आधे घंटे बाद एक और ट्रेन थी अब रोहन और चंचल उस ट्रेन से दिल्ली पहुंचे और सब एक साथ मिल कर दिल्ली से देहरादून के लिए रवाना हो गए…

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