पिता के सपने

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पिता ने फिर एक ख्वाब सजाया है
बेटे का दाखिला बड़े शहर में कराया है
अफसर बनेगा बेटा ख्याल कुछ यूं आया है

पूरा करूँगा सपना बेटे का वचन आया है
क्योंकि पिता सपने सहेजने का काम मुश्किल से कर पाया है

पैर छूकर पिता के बेटा शहर चला आया है
पिता चुपके से पूंजी का इंतज़ाम कर पाया है
अब पिता की मजबूरी देख बेटे ने
पढ़ने में मन तो लगाया है, पर!
क्या करें शहर की हवा से कौन बच पाया है

आज पिता ने हाल जानने के लिए खत पहुंचाया है
शहर में व्यस्त बेटा उत्तर ना दे पाया है
पिता के सपने से घर मे कुछ अभाव आया है
सालों पिता एक जोड़ी कुर्ता ना सिला पाया है

दीवाली पर घर दोगुना सजाया है
बेटा आएगा घर उम्मीद में जल्दी सबको जगाया है
बेटे के ना आने की खबर ने सताया है
बाहर से खुश पर मायूस अंदर से हो आया है

यार क्या करें पिता नाम भी तो बड़ा है

पिता आज बड़े शहर में बेटे से मिलने को आया है
गांव के उस शांत बेटे को शहरी उद्दंड पाया है
यारों के बीच पैर भी ना छू पाया
किस्मत के धनी ने कमाल बेटा पाया है
क्या करें आज फिर पिता ने एक ख्वाब सजाया है

पढ़ के पढ़ाई बेटा अफसर बन आया है
बूढ़े बाप ने बेटे को गले से लगाया है
साथ ले जाने में असमर्थ बेटे ने बताया है
समझ गया पिता की गले एक अफसर को लगाया है
फिर भी पिता ने ख्वाब सजाया है

बन अफसर उस बेटे को पिता याद न आया है
एक बार ना सोचे किन हाल में उन्हें छोड़ आया है
दाना पानी का बंदोबस्त ज़बरदस्त कर आया है
पर इज़्ज़त की भूख अन्न कहाँ मिटा पाया है

बेटे के इस रूप को सह ना पाया
रक्त के उस रिश्ते पर उसे शक हो आया है
आज फिर पिता ने एक सपना सजाया है
अब तो अंत समय आया है
कमी परवरिश में ढूंढ ना पाया है
अफसर को पाकर उसने बेटा गंवाया है
उम्र के इस दौर में ठगाकर
पितृत्व का इनाम बेमिसाल पाया है

सपना तो अब टूटता नज़र आया है
पिता लंबी नींद सोया और फिर पिता ने नया ख्वाब सजाया है

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