रिजल्ट, ‘क्योंकि मैं एक बहू हूं’

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अदिति का रिजल्ट आने वाला है और इस बारे में पूछने के लिए वो आज उसके कॉलेज फोन लगाने वाली थी। अपने रिजल्ट के बारे में वो आदित्य जो उसके पति हैं, सिर्फ अपने पति के अलावा किसी को भी नहीं बता पाई। ऑफिस आने के बाद अदिति ने कुछ रुटीन वीडियो स्टोरी बनाने के लिए दे दी (अदिति एक वेब पोर्टल में वॉइस ओवर आर्टिस्ट है)। साढ़े 8 बजे से बेसब्रों की तरह साढ़े 10 बजने का इंतजार करने लगी आखिर कॉलेज फोन जो लगाना था। खैर काम करते करते साढ़े 10 भी बज गए। अदिति ने अपना मोबाइल उठाकर कॉलेज का नंबर मिलाया तो इंफोर्मेशन विंडो वाले सर ने फोन उठाया और दो शब्दों में जवाब देते हुए रिजल्ट आने की तारीख 27 जून बताते हुए फोन कट कर दिया

इस इंफोर्मेशन को अदिति ने अपने कॉलेज के व्हाट्सअप ग्रुप में शेयर कर दिया। थोड़ी ही देर में अदिति की क्लासमेट सोनम ने एक इमेज ग्रुप में शेयर की और लिखा ‘बहनों रिजल्ट आ गया है।’

इधर अदिति को खुद पर हंसी आ रही थी और उन सर पर गुस्सा, रिजल्ट की इस ईमेज को अदिति डाउनलोड करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी, डर रही थी कि कहीं फिर से तो इस सेम में उसकी ATKT नहीं आ गई हो? ऑफिस में बैठी अदिति का चंचल मन 1 साल पीछे पहुंच गया और वो सारी यादें ताजा हो गई कि कैसे बड़ी मुश्किल से उसे पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए एडमिशन मिला, कितनी ही रुकावट उसके एडमिशन के समय आई, वगैहरा-वगैहरा, लेकिन अदिति और उसके पति आदित्य ने जी तोड़ मेहनत की और फाइनली अदिति का एडमिशन हो गया। बहुत खुश हुए थे दोनों इस एडमिशन से और अदिति ने तो खुदसे सबको बताया भी था कि काफी समय बाद उसने अपनी पढ़ाई शुरू कर दी।

ऑफिस के ही एक कलीग हर्ष सर की आवाज से अदिति का ध्यान टूटा। उसने उस ईमेज को डाउनलोड किया और अपने दाएं हाथ की तर्जनी अंगुली को अपने नाम के आगे सीधी लाइन में आगे बढ़ाते हुए देखा तो वहां लिखा था पास। अब उसने चैन की सांस ली और आदित्य को कॉल कर रिजल्ट की जानकारी दी।

(आप सोच रहे होंगे कि जब अदिति पास हो गई तो अपने रिजल्ट के बारे में सबको बताने में क्यू संकोच कर रही थी। आइए जानते हैं…)

जब अदिति घर पहुंची तो डिनर के बाद आदित्य से मायूस होकर बोली कि ‘मैं अपने रिजल्ट के बारे में मम्मी जी को बताना चाहती हूं, लेकिन ये भी जानती हूं कि वो खुश नहीं होंगी क्योंकि बहू जो हूं मैं उनकी(वहीं तो थी जो शुरू से अभी तक मेरी पढ़ाई का विरोध करती आईं थी)’ पहली बार अदिति को अपने रिजल्ट आने की खुशी मानों उस खुशी जैसी नहीं हुई थी जैसे खुद के पापा के घर रहकर होती थी। (एक बार फिर इस किस्से ने बहू-बेटी में अंतर को सामने लाकर रख दिया था) ये सोचते-सोचते वो रात की गहराई में नींद के आगोश में चली गई।

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