सफरनामा…

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सांस का भी है गज़ब सफरनामा….
हम चलते जा रहे हैं, जिंदगी गुज़रती जा रही है

अपनों के पीछे, कभी सपनों के पीछे…
बस चले जा रहे हैं….चलते जा रहे हैं।

कदम रुके भी तो, थक कर कभी लड़खड़ाकर…
फिर धीरे से कानों में इक आवाज गूंजी….

जिम्मेदारियों ने कुछ कहा, तो कभी मां के ख्वाबों ने…
रो कर चल दिए…कभी हंस कर….

फिर से हम चल दिए… उस सफर पर….
जिसकी न तो मंजिल है न ही कोई किनारा…
बस चले जा रहे हैं…. चलते जा रहे हैं।

दिल कहता है यही तो है जिंदगी,
मन कहता है सफर है ये… मंजिल अभी मिली नहीं…

कदम फिर चल दिए और सफर में ही कट गई जिंदगी।
हां… सांस का सफरनामा गजब का है….
जब तक थी तो रुके नहीं.. जब रुक गई तो चले नहीं।

सोनू सिंह, भोपाल

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